अमेरिका के आर्थिक इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बन गया है. पहली बार देश का राष्ट्रीय ऋण $37 ट्रिलियन के आंकड़े को पार कर गया है. आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 के अंत तक यह कर्ज़ 37.08 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुँच चुका था. यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब संघीय बजट लगातार भारी घाटे में चल रहा है और सरकारी खर्चे तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
सिर्फ छह साल पहले, 2019 में अमेरिका का कुल ऋण लगभग $23 ट्रिलियन था, लेकिन महामारी, प्रोत्साहन पैकेज, रक्षा खर्च और सामाजिक कार्यक्रमों के कारण यह तेजी से बढ़ा है. अब स्थिति यह है कि सरकार हर साल लगभग $2 ट्रिलियन का घाटा दर्ज कर रही है और वार्षिक खर्च करीब $7 ट्रिलियन तक पहुँच गया है।
यह बढ़ता कर्ज़ अमेरिकी नागरिकों पर भी भारी बोझ डाल रहा है. औसतन हर नागरिक पर करीब $1.08 लाख डॉलर का ऋण भार है, जबकि करदाताओं पर यह बोझ $3.23 लाख डॉलर से अधिक है. आर्थिक दृष्टि से देखें तो debt-to-GDP ratio 123% के पार पहुंच चुका है, जो दर्शाता है कि देश का कर्ज़ उसकी सालाना आर्थिक उत्पादन क्षमता से काफी अधिक हो गया है।
ब्याज भुगतान अब अमेरिकी सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है. वर्तमान में, राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज भुगतान सालाना $1 ट्रिलियन से अधिक है, और यह संघीय राजस्व का लगभग चौथाई हिस्सा खा जाता है. इसका मतलब है कि कर से आने वाली आमदनी का एक बड़ा हिस्सा केवल ब्याज चुकाने में चला जाता है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों के लिए संसाधन सीमित हो जाते हैं।
आर्थिक विशेषज्ञ इस स्थिति को लेकर चेतावनी दे रहे हैं. कुछ अर्थशास्त्री इसे एक वित्तीय संकट की शुरुआत मानते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यदि अर्थव्यवस्था में ग्रोथ बनी रहे तो कर्ज़ का यह स्तर तुरंत विनाशकारी नहीं होगा।
सत्ता में आने से पहले ट्रंप ने वादा किया था, की वो अमेरिका के कर्ज को कम करेंगे लेकिन ऐसा होते नही दिख रहा. अमेरिका पर कर्ज बढ़ता जा रहा है, जो कि पूरी दुनिया के लिए एक आर्थिक न्यूक्लियर बॉम्ब से कम नही है।
यह स्थिति दर्शाती है कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को भी वित्तीय अनुशासन और संतुलित नीतियों की सख्त जरूरत है।
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