सोना (Gold) भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था दोनों में एक अहम स्थान रखता है. हर रोज़ न्यूज़ चैनलों, अख़बारों और वेबसाइटों पर सोने के ताज़ा रेट देखने को मिलते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सोने का भाव तय कैसे होता है?
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमत (International Gold Rate):
सोने की कीमत सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तय होती है, जहां सोना एक कमोडिटी के रूप में ट्रेड होता है. यह कीमत मुख्य रूप से लंदन बुलियन मार्केट, कॉमेक्स (COMEX) और अन्य वैश्विक कमोडिटी एक्सचेंजों में ट्रेडिंग के आधार पर तय होती है।
सोने का भाव हर दिन इसकी वैश्विक मांग, आपूर्ति और निवेश से जुड़ी गतिविधियों के आधार पर निर्धारित होता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली हलचल का सीधा असर भारत में सोने की कीमत पर पड़ता है।
विश्व में अशांति, युद्ध और महंगाई का सोने की कीमतों पर असर
जब दुनिया युद्ध, राजनीतिक अशांति, आर्थिक मंदी या महंगाई जैसी चुनौतियों का सामना करती है, तो निवेशकों का भरोसा परंपरागत सुरक्षित विकल्पों की ओर मुड़ जाता है. ऐसे समय में सोना एक सुरक्षित निवेश के रूप में उभरता है, और इसी कारण इसके दामों में अक्सर तेज़ी देखी जाती है. इतिहास गवाह है कि जब वैश्विक अस्थिरता बढ़ती है, तब सोने की चमक और भी बढ़ जाती है।
सोना लंबे समय से ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven Asset) के रूप में जाना जाता रहा है, और ऐसे अस्थिर समय में इसकी मांग बढ़ जाती है।
प्रमुख कारण जो सोने के दाम को प्रभावित करते हैं:
1. भू-राजनीतिक तनाव: युद्ध, सैन्य संघर्ष या अंतरराष्ट्रीय टकराव जैसे हालातों में निवेशक असुरक्षित महसूस करते हैं और सोने को ‘सुरक्षित संपत्ति’ मानते हैं।
2. आर्थिक मंदी और अनिश्चितता: जब वैश्विक आर्थिक विकास धीमा होता है, तो सोना एक स्थिर निवेश विकल्प के रूप में उभरता है।
3. महंगाई: जब मुद्रास्फीति बढ़ती है और मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है, तो सोने को मूल्य-संरक्षक के रूप में देखा जाता है।
4. डॉलर की कमजोरी: अमेरिकी डॉलर और सोने का संबंध अक्सर विपरीत होता है. जब डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोना महंगा हो जाता है।
5. ब्याज दरों में बदलाव: केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती से सोने की मांग बढ़ सकती है, क्योंकि अन्य निवेशों पर रिटर्न कम हो जाता है।
डॉलर बनाम रुपये की कीमत (USD-INR Exchange Rate):
भारत में सोना आयात किया जाता है और इसकी कीमत डॉलर में होती है. अगर रुपया कमजोर होता है तो भारत में सोना महंगा हो जाता है, और अगर रुपया मजबूत होता है तो सोना सस्ता।
इम्पोर्ट ड्यूटी और टैक्स (Import Duty & GST):
भारत सरकार सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी, एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर सेस और GST लगाती है. ये सारे टैक्स मिलाकर भारत में सोने की कीमत बढ़ जाती है।
भारत में सोने की कीमत कैसे आती है दुकानों तक?
1. इंटरनेशनल मार्केट रेट को बेस माना जाता है।
2. उस पर डॉलर-रुपया रेट और इम्पोर्ट ड्यूटी जोड़ी जाती है।
3. इसके बाद GST और स्थानीय ज्वैलर्स का मार्जिन जोड़ा जाता है।
4. अंततः ग्राहकों तक वही फाइनल प्राइस पहुंचती है।
निष्कर्ष:
Gold की कीमतें केवल बाज़ार की मांग या त्योहारों पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों, मुद्रा विनिमय दर, सरकारी नीतियों और वैश्विक घटनाओं से भी प्रभावित होती हैं. इसलिए, अगली बार जब आप सुनें कि सोना महंगा या सस्ता हो गया है, तो समझिए कि इसके पीछे सिर्फ एक वजह नहीं, बल्कि कई जटिल कारक काम करते हैं।
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